O, Sajana Barkha Bahaar Aayi

“Parakh” – 1960

 

ओ सजना
ओ सजना, बरख़ा बहार आयी
रस की फुहार लायी
अखियों में प्यार लायी
ओ सजना, बरख़ा बहार आयी
रस की फुहार लायी
अखियों में प्यार लायी
ओ सजना

तुम को पुकारे मेरे मन का पपीहरा
तुम को पुकारे मेरे मन का पपीहरा
मीठी-मीठी अगनि में जले मोरा जीयरा
ओ सजना, बरख़ा बहार आयी
रस की फुहार लायी
अखियों में प्यार लायी
ओ सजना

ऐसी रिम-झिम में ओ सजन
प्यासे-प्यासे मेरे नयन
तेरे ही ख़्वाब में खो गये
ऐसी रिमझिम में ओ सजन
प्यासे-प्यासे मेरे नयन
तेरे ही ख़्वाब में खो गये

सांवली सलोनी घटा
जब जब छायी
सांवली सलोनी घटा
जब जब छायी
अखियों में रैना गयी
निंदिया न आयी

ओ सजना, बरख़ा बहार आयी
रस की फुहार लायी
अखियों में प्यार लायी
ओ सजना बरख़ा बहार आयी
रस की फुहार लायी
अखियों में प्यार लायी
ओ सजना

Has this song ended? Really? Why! O, why hasn’t Shailendra continued writing more  stanzas? Did it stop raining? Salil da, what an outstanding composition! Lata ji – her voice  with just the right timbre, her high notes in sync with the rim-jhim. Sadhana, beautiful, expressive, simple… standing there watching the downpour, pouring her thoughts in song… thinking of her beloved… “O, sajana!”… O, Sadhana!

 

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